कुल पेज दृश्य
जीवन परिचय
Blogger द्वारा संचालित.
मनपसंद वर्ग चुने
लोकप्रिय लेख
-
महामति प्राणनाथ, मध्ययुगीन भारत के अंतिम संत-कवि थे। उन्होंने अपना समस्त जीवन धार्मिक एकता के लिए समर्पित किया था। इसके लिए प्रणामी ना...
-
नीलम संजीवा रेड्डी भारत के छठें राष्ट्रपति थे। वे एक राष्ट्रवादी व्यक्तित्व वाले व्यक्ति थे। सामान्य स्वाभाव लेकिन पक्के राष्ट्रवादी थ...
-
फखरुद्दीन अली अहमद एक अनुकरणीय व्यक्तित्व वाले इंसान थे । उनके व्यक्तित्व पर एक संपन्न परिवार से संबंधित होने की झलक साफ दिखाई पड़ती थी ।...
फ़ॉलोअर
अरस्तू (384-322 ईपू), एक ग्रीक दार्शनिक थे। वें दुनिया के बड़े विचारकों में से एक थे। उनके लेखन के घेरे में विचारों के सभी क्षेत्र शामिल है। अरस्तू का मानना था कि पृथ्वी ब्रह्मांड के केंद्र में है और केवल चार तत्वों से बनी है: मिटटी, जल, वायु, और अग्नि। उनके मतानुसार सूरज, चाँद और सितारो जैसे खगोलीय पिंड परिपूर्ण और ईश्वरीय है और सारे पांचवें तत्व से बने है जिसे वें ईथर कहते थे।
![]() |
| अरस्तू |
सदस्यता लें
टिप्पणियाँ भेजें (Atom)

0 टिप्पणियाँ:
एक टिप्पणी भेजें